दिल्ली की राजनीति में जब भी किसी को कोई राजनीतिक पद मिलता है तो राजनीतिक गलियारे में उसके व्यक्तित्व और कामों से अधिक चर्चा इस बात पर होती है की पद पाने वाला व्यक्ति किसका ख़ास या किसका आदमी है|
शिवपाल जब समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष भाई रामशरण के जाने के बाद बना, तो दिल्ली वाले नेता लोग और पत्रकारों ने मुझसे पूछा "शिवपाल किस का आदमी है"| मैंने वही जवाब दिया तो महसूस किया कि शिवपाल समाजवादी पार्टी, कार्यकर्ताओं और मेरा आदमी है| बरेली में ही मैंने कहा था कि रामशरण और हम लोग बूढ़े हो गए, चलने-फिरने की दिक्कत होती है, हम दोनों को छुट्टी दो, मुलायम सिंह बोले कि जब तक आप लोग जिंदा रहोगे, कब तक पद पर रहोगे, मुलायम हमारा नेता है, हमारी सारी बात मानता है, उसकी बात मैं कैसे मना करूं, रामशरण भले ही अध्यक्ष रहा हो परदेस में धरना-प्रदर्शन अगुवाई,मीटिंग, अधिवेशन वगैरा का संयोजन आदि, सब शिवपाल ही करता रहा है| उसके मेहनत और ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठा सकता| मैंने उसके काम को देखते हुए मुलायम व बाकी नेताओं से कहा कि शिवपाल को प्रदेश की जिम्मेदारी दो, संगठन चलाने के लिए जो गुण चाहिए, उसमें है| वह हमें बूढों और नए रंगरूटों के बीच पुल का काम बढ़िया से कर सकेगा | मुलायम, रामशरण, मैं, सभी उसे उतना ही मानते हैं जितना छोटा कार्यकर्ता |
ऐसे पाँच-छै नेता और मिल जाएं तो जालिम सरकार को हम लोग इस बुढ़ौती में पलट दें | मैं जब भी दिल्ली आता है मेरे पास घंटों बैठता है कभी-कभी पूरा दुख पता है कि शब्दों में बता नहीं सकता | कद्दावर सड़क मंत्री रह चुका है | मुलायम का भाई, है हमारा नेता है, फिर भी राज-रोग हमसे दूर है, वैसे ही पैर छूता है जैसे पहले छूता था, मानकर मिठाई खाता है, जैसे पहले खाता था जितना शालीन है उतना ही जिद्दी है पर आएगा तो सरकार उखाड़ फेंकेगा | यह मुलायम का लक्ष्मण भी है हनुमान भी है कुछ मूर्ख इसको गुंडा कहते हैं अपनी भी पार्टी वाले मुंह पर तो कुछ नहीं कहते पीठ पीछे कहते हैं जयशंकर प्रसाद की कहानी वाला "नन्हाकु सिंह" है ऐसा लड़ाका है जहां भी अन्याय जो जहां भी अन्याय देखता है खड़ा हो जाता है, अड़ जाता है जो लोग गुंडई बहादुरी का फर्क नहीं समझते वही शिवपाल को गुंडा कहते हैं व समझते हैं यह भी सच है कि वह थोड़ा "बम्मड़" है लेकिन समय के साथ उसमें काफी सुधार आएगा क्योंकि उसमें सीखने और अपने को और सुधारने की ललक है जब मैंने अपने से उम्र में छोटे मुलायम को "नेताजी" बोला था तो कई सोशलिस्ट पार्टी वाले दोस्तों ने कहा कि "जिनेश्वर पछताओगे" मैंने जो महसूस किया वह बोला मुलायम सिंह का संघर्ष देखकर "नेता" कहा था आज वही साथी आकर कहते हैं जनेश्वर तुम सही थे मुलायम ने समाजवाद के झंडे को झुकने नहीं दिया एक दिन मुलायम का या भाई बहुत आगे जाएगा दुखियारों की लाठी बनेगा शिवपाल की खासियत है जिस के नाते यह हम सभी का चहेता है किसी भी मोर्चे पर लगा दो लगा रहता है कोई काम या जिम्मेदारी सौंप दो फिर दाएं बाएं नहीं देखता अध्यक्ष बनने के बाद या पहले ही कसौटी पर खरा उतरा उप चुनाव में विपक्ष का जितना बड़ी बात होगी लेकिन शिवपाल की सेना भदोही की लड़ाई जीतकर लौटी है शिविरों में शिवपाल की सक्रियता गजब की होती है जनता और भीड़ से वह भागता नहीं वह बक़बक़हा नेता नहीं है काम करने वाला नेता है उसे देख कर लगता है कि हमारे बाद की पीढ़ी आंदोलन को समाजवाद को और आगे बढ़ाएगी 15वीं लोकसभा चुनाव में समाजवादी पलटन यूपी में अव्वल रही | हाथ और हाथी दोनों के पीछे धकेल दिया 12 मैं जब यूपी वाला चुनाव होगा तो यह पलटन हाथी का राज पलट देगी पता नहीं तब मैं रहूंगा कि नहीं रहूंगा सुकूँ वाली बात है कि शिवपाल वगैरा अच्छा काम कर रहे हैं हमारे जाने के बाद भी गांव गरीब कमजोर की लड़ाई कमजोर नहीं होगी मुलायम कमजोर नहीं पड़ेगा मैंने दीपक से कहा कि शिवपाल के पास संघर्ष और जनता के संवाद का गहरा अनुभव है उसके पास बैठो बातें करो उसे लिखकर छपवा और उसकी फोटो कॉपी बटँवाओ मेरे अनुभव को भी कलम बंद करो ध्यान से विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों पर तक सीमित नहीं कबीर, तुलसी, प्रेमचंद्र, का ज्ञान प्रोफेसरों वाले ज्ञान से ज्यादा विस्तृत वह गहरा है मुझे पूरा विश्वास है कि शिवपाल और उसकी टोली आने वाले दिनों में हमारी पीढ़ी ने समाजवादी को जहां तक पहुंचाया है उसे आगे ले जाएगा, नया आकाश देगी
(यह लेख जनेश्वर जी ने मार्च 2009 को समाजवादी युवजन सभा द्वारा प्रकाशित होने वाली लघु-पुस्तिका में लिखा था जिसका ध्येय पांचवें राज्य अधिवेशन में नव-निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के व्यक्तित्व से नई दिल्ली और राष्ट्रीय मीडिया के अवगत कराना था)
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
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