मुझे एक वाक्य शिवपाल सिंह यादव पर लिखना है तो मैं कहूँगा कि शिवपाल सिंह सन्तपुरुष है। शिवपाल बिना नफा-नुकसान का आकलन किए मैत्रिक-धर्म का पालन करता है। वह मित्रों का मित्र है। सपा सरकार में उससे ज्यादा काम कोई कैबिनेट मंत्री नहीं कर सका। मैं उन्हें काफी पहले से जानता हूँ। उसमें कविता और साहित्य की समझ सामान्य लोगों से ज्यादा है। वह कवि नहीं तो कविहृदय तो है ही। मेरा बहुत सम्मान करता है। इतना सम्मान कोई और नहीं कर सकता। शिवपाल इसलिए करता है क्योंकि सरस्वती-पुत्रों के प्रति उनके मन में अथाह श्रद्धा है, जिसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं। मैंने अखबारों में पढ़ा कि शिवपाल सिंह ने मेरे लिए ‘‘भारत-रत्न’’ की माँग की है। पढ़कर लगा कि कोई तो है जो साहित्यकारों और कवियों की वंचना को स्वर दे रहा है। कनाडा, अमरीका, रुस, यूरोप, अरब हर जगह लोग गोपाल दास ‘‘नीरज’’ को जानते हैं। नीरज 1944 से साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। सत्तर साल की अहर्निश सेवाओं को क्या सर्वोच्च नागरिक सम्मान नहीं मिलना चाहिए। मात्र 20 साल की सेवा के बदले क्रिकेटर को ‘‘भारत-रत्न’’ सम्मान दे दिया गया। शिवपाल ने सही सवाल उठाया कि क्रिकेट, सिनेमा, विज्ञान, राजनीति, समाजसेवा, शिक्षा-जगत हर क्षेत्र के प्रतीक-पुरूषों को भारत रत्न विभूषण दिया गया। क्या भारतीय साहित्य जगत में एक भी व्यक्ति ‘‘भारत-रत्न’’ विभूषण के योग्य नहीं है। हिन्दी को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए भी लोहिया व मुलायम की तरह शिवपाल कुछ न कुछ करते रहते हैं।
नीरज जी ने यह लेख शिवपाल जी के 60वें जन्मदिन के अवसर पर प्रकाशित पत्रिका हेतु भेजा था
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल
भारत-लंका के समाजवादियों के संवाद-सेतु