मित्र-धर्म निभाने वाले सन्त पुरुष

-गोपाल दास ‘नीरज’

महान समाजवाद चिन्तक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के दिन 12 अक्टूबर, 1938 को जन्मे उर्दू के नमुझे एक वाक्य शिवपाल सिंह यादव पर लिखना है तो मैं कहूँगा कि शिवपाल सिंह..

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प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी

-दीपक मिश्र

बसंत पंचमी के पवित्र दिन साहित्य जगत में महाप्राण के विभूषण से विभूषित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘‘निराला’’ का जन्म हुआ था, जिन्होंने अपनी कलम और कला को आम आदमी व वंचित वर्ग का स्वर बनाया...

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कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल

-जनेश्वर मिश्र

दिल्ली की राजनीति में जब भी किसी को कोई राजनीतिक पद मिलता है तो राजनीतिक गलियारे में उसके व्यक्तित्व और कामों से अधिक चर्चा इस बात पर होती है की पद पाने वाला व्यक्ति किसका ख़ास या किसका आदमी है|...

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शिवपाल की कहानी,साथियों की जुबानी

शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष यह सर्वविदित तथ्य है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव अपने वय व कद के सभी नेताओं से अलग व विशिष्ट हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में दल बनाकर और लगातार सक्रियता से चलाकर उन्होंने साबित कर दिया कि उत्तर ... -दीपक मिश्र आगे पढ़ें...
क्यों लुभाते हैं शिवपाल आम तौर पर ज्यादातर लोग शिवपाल जी के संघर्ष और शासन-प्रशासन पर उनकी पकड़ की प्रशंसा करते हैं किन्तु मुझे विनम्र और गरीबों की मदद के लिए सदैव उद्यत रहने वाले शिवपाल ज्यादा अच्छे लगते हैं। अक्सर अखबारों में पढ़ता हूँ कि शिवपाल ने यतीमो... -संदीप अग्रवाल (प्रतिष्ठित समाजसेवी) आगे पढ़ें...
हिन्दी जन-दूत श्री शिवपाल यह महज संयोग नहीं की सरस्वती पुत्र महाप्राण-महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती और हिन्दी के लिए लम्बी लड़ाई लड़ने वाले शिवपाल यादव जी का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है। यह नियति का सदेच्छा है। इस मणिकांचन सुयोग के पीछे के तथ्यों ... -दीपक राय आगे पढ़ें...

दिल की रह गुज़र से

दिल की रह गुज़र से महान समाजवाद चिन्तक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के दिन 12 अक्टूबर, 1938 को जन्मे उर्दू के नवप्रवर्तनकारी शायरों में अग्रगण्य निदा फाज़ली ने लिखा है “हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना, दरिया के उस किनारे सितारे भी फूल भी, दरिया चढ़ा हो तो उस पार देखना, दो-चार गाम राह को हमवार देखना“ ये पंक्तियां उन्होंने जिसके लिए भी चाहे जिस संदर्भ में लिखी हों किन्तु जिस वर्ष राममनोहर लोहिया ने हैदराबाद में सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की थी, उसी वर्ष 1955 के वसंत पंचमी के पवित्र दिन संवेदनशील सुघर सिंह व करुणा की मूरत मूर्ति देवी के पुत्र तथा 21वीं सदी में भारतीय समाजवाद के शिखर पुरुष मुलायम सिंह के अनुज के रूप में जन्मे शिवपाल के प्ररिप्रेक्ष्य में सटीक व शब्दशः सही प्रतीत होती हैं। हृदय की चित्र-विथिका में उनकी अनेकानेक तस्वीरें विद्यमान हैं, हर तस्वीर उनकी अलग-अलग भूमिकाओं का प्रतिनिधित्व करती ह...... आगे पढ़ें...

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