सहृदय शिवपाल जी अपने नाम को चरितार्थ करते हैं। ‘‘यथा नाम तथा गुण’’ कहावत उनके ऊपर एक दम सटीक बैठती है। ‘‘शिव’’ शब्द ‘‘श्’’ धातु से बना है-श्$इव। ‘‘श्’’ में ‘‘इव’’ प्रत्यय जुड़ता है तो शिव हो जाता है जिसका मतलब होता है-कल्याण करने वाला। ‘‘सत्य’’ भी जब तक शिव न हो सुन्दर नहीं होता। इसीलिए ‘‘सत्यं-शिवं-सुन्दरम्’’ कह उक्ति कही गई है। शिवपाल का अर्थ होता है-जो शिवत्व का पालक हो अर्थात् जो कल्याणकारी हो। इसमें दो राय नहीं शिवपाल जी सबके कल्याण की सदैव सोचते रहते हैं और यथासम्भव करते भी हैं। गरीबों की मदद के लिए हमेशा तैयार व तत्पर रहने वाले शिवपाल जी ने अपने नाम की सार्थकता व अर्थवेत्ता को सही साबित किया है। एक छोटी घटना किन्तु इससे शिवपाल जी की सोच व कार्यप्रणाली प्रतिध्वनित होती है। वे जसवंतनगर से लखनऊ आ रहे थे। 23 दिसम्बर 2013 तदानुसार पूस के कृष्ण पक्ष की सर्द रात सर्दी इतनी कि उत्तर प्रदेश साइबेरिया का ताऊ लग रहा था। कानपुर के पास शिवपाल जी को ठण्ड से काँपता हुआ एक बुजुर्ग बोरा लपेटे हुए दिखा। वह बोरे से सर ढँकता तो पैर खुल जाता, पैर ढँकता को सर। शिवपाल जी ने गाड़ी रोकवाई और जो शाल ओढ़े थे वही उसे ओढ़ने के लिए दे दिया। कम्बल आदि खरीदने के लिए पैसे भी दिए। मदद करना शिवपाल जी की आदत है। मरीजों को अस्पताल पहुंचवाना, गरीबों की पढ़ाई की व्यवस्था कराना, शिविर लगवाकर सर्दियों में कम्बल बँटवाना, अनाथों में त्यौहार मनवाना जैसे कार्य उनके दिनचर्या में शामिल है।
शक्ल-ओ-सूरत इंसानों जैसी है,
काम मगर फरिश्तों जैसा है।
जानो साथी अपने नेता कैसे है,
सोचो अपना शिवपाल अपना चाचा कैसा है।
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल
भारत-लंका के समाजवादियों के संवाद-सेतु