मैंने चौधरी चरण सिंह के साथ काम किया है जो किसानों के मसीहा थे। उन्हें किसानों का सच्चा दर्द कहा जाता है। वे देश के प्रधानमंत्री हुए। उनका पुत्र उनकी विरासत को आगे नहीं बड़ा पाया। हालांकि केन्द्रीय मंत्री तक बना पर चौधरी साहब वाली बात उसमें नहीं है, इसलिए फेल हो गया। चौधरी साहब के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव के साथ जुड़ा क्योंकि मुझे मुलायम सिंह यादव में चौधरी साहब की छवि दिखी। मुलायम सिंह जी ने चौधरी साहब की राजनीतिक परम्परा को आगे बढ़ाया। अब मैं शिवपाल सिंह यादव के साथ हूँ, इसका एकमात्र कारण है कि शिवपाल यादव ही चौधरी चरण व मुलायम सिंह की तरह गाँव-गरीब का दर्द समझते हैं। कमजोरों के आँसू की पीड़ा जानते हैं और पोंछने के लिए आगे आते हैं। गरीब से गरीब कार्यकर्ता उनसे मिल सकता है और अपनी बात बता सकता है। चौधरी चरण सिंह के लिए शिवपाल सिंह के दिल में बहुत सम्मान है। चौधरी साहब राजस्व मंत्री रहते हुए जो काम पचास दशक में करना चाहते थे या जिन कामों को उन्होंने शुरू किया, शिवपाल यादव जी ने राजस्व मंत्री बनने बाद पूरा किया। उसमें सबसे बड़ा काम राजस्व संहिता में संशोधन है ताकि किसान को न्याय मिले और वह चिन्तामुक्त होकर खेती-किसानी करें। शिवपाल जी को थोड़ा और समय व शक्ति मिली होती तो चौधरी के साहब के सोच एवं सपनों को वे और अधिक धरती पर उतारते। किसान और गाँव के लोग, चाहे वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हों या पूर्वी उत्तर प्रदेश के, मानते हैं कि चरण सिंह व मुलायम सिंह के बाद शिवपाल सिंह गाँव-गरीब-खेती-किसानी से जुड़े हुए नेता हैं। धीरे-धीरे अब बात चल निकली है कि इस समय गरीबों व किसानों का नेता शिवपाल ही है।
मैं कह रहा था कि चौधरी साहब के लिए अपने भाई मुलायम सिंह की तरह शिवपाल के मन में भी असीम सम्मान है तभी तो 23 दिसम्बर को चौधरी साहब की जयंती चौधरी चरण सिंह डिग्री काॅलेज में पूरे दिन मनवाते हैं। चौधरी साहब तीन किताबें लिखकर और लिखवाकर लाखों की संख्या बंटवाया। अखबारों में लेख लिखे। चौधरी साहब पर पहली ई-बुक शिवपाल जी की ही पहल व प्रेरणा में निकली। इतना काम चौधरी साहब के उन लोगों ने भी नहीं किया होगा जिन्होंने चौधरी साहब के नाम पर और उनकी कृपा से करोड़ों कमाये हैं, बड़ी-बड़ी कुर्सियाँ पाई हैं।
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल
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