शिवपाल की कहानी,साथियों की जुबानी

शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष

शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष यह सर्वविदित तथ्य है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव अपने वय व कद के सभी नेताओं से अलग व विशिष्ट हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में दल बनाकर और लगातार सक्रियता से चलाकर उन्होंने साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश में उनकी वैयक्तिक पकड़ सर्वाधिक है। जन-मानस में श्री शिवपाल की जो पकड़ है वो किसी भी प्रांतीय नेता के मुकाबले अधिक है। इतने कम समय में प्रसपा को उन्होंने अपनी सांगठनिक क्षमता व भागीरथ प्रयासों से देश के सबसे बड़े सूबे उ.प्र. के गांव गांव तक पहुॅचा दिया। हर जिले में दल की सशक्त इकाइयाँ खडी कर दी। उ.प्र. के गत तीन आम चुनाव के परिणाम साक्षी हंै कि बिना शिवपाल यादव के जो भी गठबंधन बने भारतीय जनता पार्टी को पराजित नहीं कर सके। उ.प्र. के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव के इस बयान को नकारा नहीं जा सकता कि बिना शिवपाल के जीत सम्भव नहीं। जिस तरह लोहिया ने साठ के दशक में गैर कांग्रेसवाद का झण्डा बुलंद किया था...

-दीपक मिश्र आगे पढ़ें...

क्यों लुभाते हैं शिवपाल

आम तौर पर ज्यादातर लोग शिवपाल जी के संघर्ष और शासन-प्रशासन पर उनकी पकड़ की प्रशंसा करते हैं किन्तु मुझे विनम्र और गरीबों की मदद के लिए सदैव उद्यत रहने वाले शिवपाल ज्यादा अच्छे लगते हैं। अक्सर अखबारों में पढ़ता हूँ कि शिवपाल ने यतीमों के संग ईद मनाई, शिवपाल अनाथों से मिलने पहुंचे, तो उनके प्रति झुकाव सा महसूस होता है। एक दो बार मिलने की इच्छा हुई तो पाँव ठिठक गए। जब अग्रवाल सभा का आमंत्रण पत्र मिला और पत्र द्वारा पता चला कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हमारे नेता शिवपाल सिंह यादव होंगे। मैंने सारी जरूरी बैठकें स्थगित की और 27 की रात का जहाज का टिकट लखनऊ के लिए करा लिया। स्वभाव से अन्र्तमुखी होने के कारण परिचय के बावजूद राजनीतिज्ञों से मैं थोड़ी दूरी बनाए रखता हूँ, पर शिवपाल से मिलने के लोभ का संभरण नहीं कर पाया। इसलिए एक दिन पहले का टिकट कराया। दुर्भाग्य से कोहरे के कारण फ्लाइट कैंसिल हो गई। दूसरे दिन 9 बजे का दोबारा टिकट कराया। शिवपाल से सम्मानस...

-संदीप अग्रवाल (प्रतिष्ठित समाजसेवी) आगे पढ़ें...

हिन्दी जन-दूत श्री शिवपाल

यह महज संयोग नहीं की सरस्वती पुत्र महाप्राण-महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती और हिन्दी के लिए लम्बी लड़ाई लड़ने वाले शिवपाल यादव जी का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है। यह नियति का सदेच्छा है। इस मणिकांचन सुयोग के पीछे के तथ्यों की मीमांशा हमें करनी पड़ेगी। सूर्यकांत त्रिपाठी माँ वाणी के वरद् पुत्र थे। उन्होंने हिन्दी को अपने कलम और साहित्यिक प्रतिभा से काफी सशक्त किया। हिन्दी को तो मजबूत किया ही साथ ही साथ हिन्दी कविता द्वारा आम जन से जुड़े सवालों को भी उठाया। उनके लिए हिन्दी-कविता व साहित्य एक आंदोलन थी। एक बार उन्होंने पंडित जवाहर नेहरु से शिकायत की थी कि हिन्दी पट्टी के राजनेता हिन्दी की मजबूती के लिए कार्य नहीं करते। वे नेहरु जी के मुकाबले लोहिया जी इसलिए पसंद करते थे, क्योंकि जी हिन्दी से जुड़े सवालों पर गंभीरतापूर्वक बहस चलाते थे। ‘‘सामंती भाषा बनाम जन-भाषा’’ बहस सर्वविदित है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सर्वमान्य ...

-दीपक राय आगे पढ़ें...

चौधरी चरण-मुलायम सिंह के बाद शिवपाल ही

मैंने चौधरी चरण सिंह के साथ काम किया है जो किसानों के मसीहा थे। उन्हें किसानों का सच्चा दर्द कहा जाता है। वे देश के प्रधानमंत्री हुए। उनका पुत्र उनकी विरासत को आगे नहीं बड़ा पाया। हालांकि केन्द्रीय मंत्री तक बना पर चौधरी साहब वाली बात उसमें नहीं है, इसलिए फेल हो गया। चौधरी साहब के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव के साथ जुड़ा क्योंकि मुझे मुलायम सिंह यादव में चौधरी साहब की छवि दिखी। मुलायम सिंह जी ने चौधरी साहब की राजनीतिक परम्परा को आगे बढ़ाया। अब मैं शिवपाल सिंह यादव के साथ हूँ, इसका एकमात्र कारण है कि शिवपाल यादव ही चौधरी चरण व मुलायम सिंह की तरह गाँव-गरीब का दर्द समझते हैं। कमजोरों के आँसू की पीड़ा जानते हैं और पोंछने के लिए आगे आते हैं। गरीब से गरीब कार्यकर्ता उनसे मिल सकता है और अपनी बात बता सकता है। चौधरी चरण सिंह के लिए शिवपाल सिंह के दिल में बहुत सम्मान है। चौधरी साहब राजस्व मंत्री रहते हुए जो काम पचास दशक में करना चाहते थे या जिन कामों क...

-चौधरी रिक्षपाल आगे पढ़ें...

मुसलमानों का सच्चा रहबर हमारा नेता

मैं अपने अब्बू कई बार के विधायक व मंत्री लोकबन्धु राजनारायण के समाजवादी आंदोलन को जीने वाले कमाल युसूफ मलिक की इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि शिवपाल चाचा एक सेकुलर तथा मुसलमानों के मसाइल व जज़्बात को समझने वाले सच्चे रहबर है। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों का सबसे ज्यादा भरोसा नेताजी मुलायम सिंह यादव के बाद किसी लीडर पर रहा है और तो वो शिवपाल जी हैं। यही कारण है कि जिस दिन शिवपाल जी की सरपरस्ती में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का एलान हुआ, जनबा कमाल युसूफ मलिक के साथ हम लोग प्रसपा में शामिल हो गए क्योंकि हमें पता है शिवपाल जी हमेशा हिन्दू-मुसलमान के एकता की बात रकते हैं। वे जितनी श्रद्धा के साथ भोलेनाथ-हनुमान जी भण्डारे में जाते हैं, जितनी सम्मान हिन्दू धर्म गुरुओं को देते हैं, उतने ही अकीदत से रोज़ा अफ्तार में जाते हैं। मजारों पे चादर चढ़ाते हैं। प्रसपा कार्यालय में यदि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्...

-इरफान मलिक आगे पढ़ें...

यथा नाम तथा गुण-शिवपाल

सहृदय शिवपाल जी अपने नाम को चरितार्थ करते हैं। ‘‘यथा नाम तथा गुण’’ कहावत उनके ऊपर एक दम सटीक बैठती है। ‘‘शिव’’ शब्द ‘‘श्’’ धातु से बना है-श्$इव। ‘‘श्’’ में ‘‘इव’’ प्रत्यय जुड़ता है तो शिव हो जाता है जिसका मतलब होता है-कल्याण करने वाला। ‘‘सत्य’’ भी जब तक शिव न हो सुन्दर नहीं होता। इसीलिए ‘‘सत्यं-शिवं-सुन्दरम्’’ कह उक्ति कही गई है। शिवपाल का अर्थ होता है-जो शिवत्व का पालक हो अर्थात् जो कल्याणकारी हो। इसमें दो राय नहीं शिवपाल जी सबके कल्याण की सदैव सोचते रहते हैं और यथासम्भव करते भी हैं। गरीबों की मदद के लिए हमेशा तैयार व तत्पर रहने वाले शिवपाल जी ने अपने नाम की सार्थकता व अर्थवेत्ता को सही साबित किया है। एक छोटी घटना किन्तु इससे शिवपाल जी की सोच व कार्यप्रणाली प्रतिध्वनित होती है। वे जसवंतनगर से लखनऊ आ रहे थे। 23 दिसम्बर 2013 तदानुसार पूस के कृष्ण पक्ष की सर्द रात सर्दी इतनी कि उत्तर प्रदेश साइबेरिया का ताऊ लग रहा था। कानपुर के पास शिवपाल जी क...

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सेकुलरिज्म व सर सय्यद के लिए ‘‘शुकरन’’

मैं शारजाह (संयुक्त अरब अमीरात) में डाक्टर और लेखिका हूँ गरीबी उन्मूलन पर अंग्रेजी और हिन्दी में पुस्तक लिखा है, जिसके ध्येय ऐसी अर्थनीति के लिए जन-मत बनाना है जिससे मादर-ए-वतन भारत की अर्थव्यवस्था कर और करप्शन मुक्त हो सके। मैंने अपनी पुस्तक लगभग सभी बड़े नेताओं, अधिकारियों व संपादकों आदि को या तो मिलकर दी या पोस्ट किया। जब मैं अरब व यूरोप को इतना आगे देखती हूँ तो सोचती हूँ कि अपना भारत इतना डेवलप क्यों नहीं कर सकता। मैंने दीपक मिश्र जी के माध्यम से अपनी पुस्तक शिवपाल जी को भेजी। मुझे भी शिवपाल जी की ‘‘लोहिया, समाजवाद व स्वतंत्रता संग्राम’’, ‘‘हिन्दी उपनिवेशवाद व समाजवाद’’ समाजवादी विचार प्रदीपिका रिटर्न गिफ्ट के रूप में मिली। मैंने हर्फ ब हर्फ पढ़ी। ये पुस्तकें जानकारी का अनमोल खजाना हैं। इन पुस्तकों की समीक्षा फिर कभी। मुझे तब बहुत अच्छा लगा जब शिवपाल सर ने मुझसे पुस्तक को हिन्दी में अनुवादित करने को कहा और कहा कि जनता की बात जनता क...

-डा0 अरशी खान आगे पढ़ें...

तिब्बतियों का तसिक दलेक

पिछले साल की बात है, मेरे नेतृत्व में 7 सांसदों को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में घूमकर तिब्बत की आजादी के लिए जनमत बनाने का काम सौंपा गया। इसी सिलसिले में भाई शिवपाल से मुलाकात हुई। उन्होंने हमारे ग्रुप का ग्रान्ड वेलकम किया। प्रेस रिलीज कर तिब्बत की आजादी का समर्थन किया। उन्होंने हमारी एक-एक बात सुनी। बातचीत के दौरान उन्होंने दो सलाह ऐसी दी कि जिसपे अमल कर हमारे आन्दोलन को बहुत विस्तार मिला। वे सच्चे लोहियावादी हैं, तभी हम बेघर हुए तिब्बतियों के लिए उनके दिल में इतना प्यार है। लोहिया पहले राष्ट्रनेता थे जिन्होंने पंडित नेहरू को तिब्बत के बारे में चेताया था। लोहिया की बात नेहरू मान लेते तो तिब्बत की समस्या नहीं होती। होली हाईनेस दलाई लामा भी लोहिया की काफी इज्जत करते थे, वे कई बार मंचों से अपने को समाजवादी कह चुके हैं। इसीलिए शिवपाल से संवाद के दौरान हमारे सभी दोस्तों को लगा कि वे किसी अपने से ही बात कर रहे हैं। शिवपाल संघर्ष की को...

-दाबा क्षीरिंग (सांसद-तिब्बत) आगे पढ़ें...

मित्र-धर्म निभाने वाले सन्त पुरुष

मुझे एक वाक्य शिवपाल सिंह यादव पर लिखना है तो मैं कहूँगा कि शिवपाल सिंह सन्तपुरुष है। शिवपाल बिना नफा-नुकसान का आकलन किए मैत्रिक-धर्म का पालन करता है। वह मित्रों का मित्र है। सपा सरकार में उससे ज्यादा काम कोई कैबिनेट मंत्री नहीं कर सका। मैं उन्हें काफी पहले से जानता हूँ। उसमें कविता और साहित्य की समझ सामान्य लोगों से ज्यादा है। वह कवि नहीं तो कविहृदय तो है ही। मेरा बहुत सम्मान करता है। इतना सम्मान कोई और नहीं कर सकता। शिवपाल इसलिए करता है क्योंकि सरस्वती-पुत्रों के प्रति उनके मन में अथाह श्रद्धा है, जिसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं। मैंने अखबारों में पढ़ा कि शिवपाल सिंह ने मेरे लिए ‘‘भारत-रत्न’’ की माँग की है। पढ़कर लगा कि कोई तो है जो साहित्यकारों और कवियों की वंचना को स्वर दे रहा है। कनाडा, अमरीका, रुस, यूरोप, अरब हर जगह लोग गोपाल दास ‘‘नीरज’’ को जानते हैं। नीरज 1944 से साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। सत्तर साल की अहर्निश सेवाओं को क्या सर...

-गोपाल दास ‘नीरज’ (साहित्य की जीवित किंवदती) आगे पढ़ें...

प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी

प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी बसंत पंचमी के पवित्र दिन साहित्य जगत में महाप्राण के विभूषण से विभूषित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘‘निराला’’ का जन्म हुआ था, जिन्होंने अपनी कलम और कला को आम आदमी व वंचित वर्ग का स्वर बनाया तथा पूँजीवादी शोषण को सीधी चुनौती दी। उनकी सहाफत व साहित्य का केन्द्र बिन्दु कभी भिखारी तो कभी पत्थर तोड़कर पेट भरने के लिए विवश कोमलांगी नारी होती थी। जिन्होंने अबे सुन बे गुलाब, भूल मत गर पाई खुश्बू रंग-ओ आब, खून चूसा खाद का तूने अशिष्ट, डाल पर इतरा रहा कैपिटलिस्ट, जैसी कालजयी पंक्तियाँ लिखीं और हिन्दी काव्य को नया आयाम दिया। वे समाजवाद व सामाजिक सद्भाव के महाकवि थे। रूढ़िभंजक महाप्राण जिस धारा के कवि थे, उसी धारा के राजनेता व क्रान्तिधर्मी चिन्तक राममनोहर लोहिया ने 1955 में अलग सोशलिस्ट (समाजवादी) पार्टी का गठन किया था, ताकि गरीबों व कमजोरों की निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके। इसी वर्ष (1955) में सुघर सिंह व मूर्ति देवी के पुत्र तथा लोहिया के अनन्य अनुयायी मुलायम सिंह ...

-दीपक मिश्र आगे पढ़ें...

कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल

कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल दिल्ली की राजनीति में जब भी किसी को कोई राजनीतिक पद मिलता है तो राजनीतिक गलियारे में उसके व्यक्तित्व और कामों से अधिक चर्चा इस बात पर होती है की पद पाने वाला व्यक्ति किसका ख़ास या किसका आदमी है| शिवपाल जब समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष भाई रामशरण के जाने के बाद बना, तो दिल्ली वाले नेता लोग और पत्रकारों ने मुझसे पूछा "शिवपाल किस का आदमी है"| मैंने वही जवाब दिया तो महसूस किया कि शिवपाल समाजवादी पार्टी, कार्यकर्ताओं और मेरा आदमी है| बरेली में ही मैंने कहा था कि रामशरण और हम लोग बूढ़े हो गए, चलने-फिरने की दिक्कत होती है, हम दोनों को छुट्टी दो, मुलायम सिंह बोले कि जब तक आप लोग जिंदा रहोगे, कब तक पद पर रहोगे, मुलायम हमारा नेता है, हमारी सारी बात मानता है, उसकी बात मैं कैसे मना करूं, रामशरण भले ही अध्यक्ष रहा हो परदेस में धरना-प्रदर्शन अगुवाई,मीटिंग, अधिवेशन वगैरा का संयोजन आदि, सब शिवपाल ही करता रहा है| उसके मेहनत और ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठा सकता| मैंने ...

-जनेश्वर मिश्र आगे पढ़ें...

भारत-लंका के समाजवादियों के संवाद-सेतु

भारत-लंका के समाजवादियों के संवाद-सेतु भारत और श्रीलंका के बीच जितना ऐतिहासिक रिश्ता है, उतना ही सांवेगिक रिश्ता भारत व लंका के समाजवादियों के मध्य रहा है|दोनों के दरम्यान संवाद और विचार विनिमय होता रहा है|भारत और लंका दोनों बुनियादी तौर पर समाजवादी गणराज्य हैं|हमारे पूरे नाम में 'समाजवादी ' शब्द है तो भारतीय संविधान के प्रस्तावना में समाजवादी शब्द है|श्रीलंका में नानक्करापथराज मार्टिन परेरा का वही स्थान व योगदान है जो भारत में लोहिया व जेपी का है| डॉ0 लोहिया की भाति डॉ0 परेरा भी लास्की के शिष्य थे|दोनों समवय थे लगभग एक ही समय यूरोप से पीएचडी होकर एशिया आए| 42 की क्रांति को मजबूत करने के लिए परेरा भारत गए थे, उस ऐतिहासिक सभा में भाग लिया था जिसमें 'करो या मरो' का नारा दिया गया था |वह 1937 में भारतीय मजदूरों के आंदोलन में शामिल हुए थे| जुलाई 43 में मुंबई में गिरफ्तार भी हुए लोहिया जब लंका आए तो विचार की संजीवनी देकर गए| उन्होंने लंका के समाजवादियों को समाजवाद का पाठ पढ़ाया| लोहिया का या कम...

-प्रो0 तिस्ता वितर्ना आगे पढ़ें...

भावों के वातायन से शिवपाल

भावों के वातायन से शिवपाल महान समाजवाद चिन्तक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के दिन 12 अक्टूबर, 1938 को जन्मे उर्दू के नवप्रवर्तनकारी शायरों में अग्रगण्य निदा फाज़ली ने लिखा है “हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना, दरिया के उस किनारे सितारे भी फूल भी, दरिया चढ़ा हो तो उस पार देखना, दो-चार गाम राह को हमवार देखना“ ये पंक्तियां उन्होंने जिसके लिए भी चाहे जिस संदर्भ में लिखी हों किन्तु जिस वर्ष राममनोहर लोहिया ने हैदराबाद में सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की थी, उसी वर्ष 1955 के वसंत पंचमी के पवित्र दिन संवेदनशील सुघर सिंह व करुणा की मूरत मूर्ति देवी के पुत्र तथा 21वीं सदी में भारतीय समाजवाद के शिखर पुरुष मुलायम सिंह के अनुज के रूप में जन्मे शिवपाल के प्ररिप्रेक्ष्य में सटीक व शब्दशः सही प्रतीत होती हैं। हृदय की चित्र-विथिका में उनकी अनेकानेक तस्वीरें विद्यमान हैं, हर तस्वीर उनकी अलग-अलग भूमिकाओं का प्रतिनिधित्व करती ...

-दीपक मिश्र आगे पढ़ें...