यह महज संयोग नहीं की सरस्वती पुत्र महाप्राण-महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती और हिन्दी के लिए लम्बी लड़ाई लड़ने वाले शिवपाल यादव जी का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है। यह नियति का सदेच्छा है। इस मणिकांचन सुयोग के पीछे के तथ्यों की मीमांशा हमें करनी पड़ेगी। सूर्यकांत त्रिपाठी माँ वाणी के वरद् पुत्र थे। उन्होंने हिन्दी को अपने कलम और साहित्यिक प्रतिभा से काफी सशक्त किया। हिन्दी को तो मजबूत किया ही साथ ही साथ हिन्दी कविता द्वारा आम जन से जुड़े सवालों को भी उठाया। उनके लिए हिन्दी-कविता व साहित्य एक आंदोलन थी। एक बार उन्होंने पंडित जवाहर नेहरु से शिकायत की थी कि हिन्दी पट्टी के राजनेता हिन्दी की मजबूती के लिए कार्य नहीं करते। वे नेहरु जी के मुकाबले लोहिया जी इसलिए पसंद करते थे, क्योंकि जी हिन्दी से जुड़े सवालों पर गंभीरतापूर्वक बहस चलाते थे। ‘‘सामंती भाषा बनाम जन-भाषा’’ बहस सर्वविदित है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सर्वमान्य नेता शिवपाल जी भी हिन्दी के सवालों पर बोलने वाले एक मात्र नेता नजर आते हैं। श्री शिवपाल ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दिलाने के लिए चल रहे अभियान को अपना मार्गदर्शन व संबल दिया है। आज हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र में जो आधी-अधूरी स्वीकृति मिली है, उसमें श्री शिवपाल व उनके अनन्य सहयोगी युवा चिन्तक दीपक मिश्र का बहुत बड़ा योगदान है। श्री शिवपाल ने संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्कालीन महासचिव वान की मून को पत्र लिखकर हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की माँग की।
मारीशस-प्रवास के दौरान हिन्दी के पक्ष में वैश्विक जन-समर्थन जुटाया जिसकी चर्चा वैश्विक हिन्दी अभियानों से जुड़े हिन्दी कर्मी सदैव करते हैं। वे सही मायने में हिन्दी के जन-दूत हैं। निराला जी होते तो शिवपाल जी की वैसे ही प्रशंसा करते जैसे गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले कवि-शिरोमणि गोपाल दास ‘‘नीरज’’ और राजनेता-साहित्यकार बालकवि बैरागी ने की थी।
हम सभी हिन्दी की लड़ाई लड़ने वाले शिवपाल जी को उनकी हिन्दी की अहर्निश सेवा हेतु नमन करते है। महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आहुत विधान-सभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शिवपाल जी ने हिन्दी के प्रश्न को उठाया और मांग की कि हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने की मांग की संकल्प उत्तर प्रदेश विधान मण्डल से पारित होना चाहिए। हम सभी हिन्दी के प्रति शिवपाल जी की प्रतिबद्धता से अभिभूत हैं और होना भी चाहिए।
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल
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