सेकुलरिज्म व सर सय्यद के लिए ‘‘शुकरन’’

मैं शारजाह (संयुक्त अरब अमीरात) में डाक्टर और लेखिका हूँ गरीबी उन्मूलन पर अंग्रेजी और हिन्दी में पुस्तक लिखा है, जिसके ध्येय ऐसी अर्थनीति के लिए जन-मत बनाना है जिससे मादर-ए-वतन भारत की अर्थव्यवस्था कर और करप्शन मुक्त हो सके। मैंने अपनी पुस्तक लगभग सभी बड़े नेताओं, अधिकारियों व संपादकों आदि को या तो मिलकर दी या पोस्ट किया। जब मैं अरब व यूरोप को इतना आगे देखती हूँ तो सोचती हूँ कि अपना भारत इतना डेवलप क्यों नहीं कर सकता। मैंने दीपक मिश्र जी के माध्यम से अपनी पुस्तक शिवपाल जी को भेजी। मुझे भी शिवपाल जी की ‘‘लोहिया, समाजवाद व स्वतंत्रता संग्राम’’, ‘‘हिन्दी उपनिवेशवाद व समाजवाद’’ समाजवादी विचार प्रदीपिका रिटर्न गिफ्ट के रूप में मिली। मैंने हर्फ ब हर्फ पढ़ी। ये पुस्तकें जानकारी का अनमोल खजाना हैं। इन पुस्तकों की समीक्षा फिर कभी। मुझे तब बहुत अच्छा लगा जब शिवपाल सर ने मुझसे पुस्तक को हिन्दी में अनुवादित करने को कहा और कहा कि जनता की बात जनता की भाषा में होनी चाहिए। मुझे महसूस हुआ कि यह शिवपाल सर नहीं उनका अनुभवजन्य ज्ञान बोल रहा है। तभी मैंने तय किया कि इसे हिन्दी में किया जाएगा। सचमुच इसके हिन्दी को ज्यादा लोगों ने सराहा व स्वीकारा मेरी तमन्ना थी कि शिवपाल जी द्वारा इसका विमोचन शारजाह विश्वविद्यालय में होता क्योंकि अरबी भारतीयों में शिवपाल जी का क्रेज है। उन्होंने सर सय्यद को भारत रत्न देने के लिए चल रहे मूवमेण्ट को जो ताकत दी, उसे हम अलीगेरियन्स और सर सय्यद में श्रद्धा रखने वालों के मन में शिवपाल जी के प्रति सम्मान और बढ़ गया। उन्हें हमारा शकरन (शुक्रिया)।

-डा0 अरशी खान

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