आम तौर पर ज्यादातर लोग शिवपाल जी के संघर्ष और शासन-प्रशासन पर उनकी पकड़ की प्रशंसा करते हैं किन्तु मुझे विनम्र और गरीबों की मदद के लिए सदैव उद्यत रहने वाले शिवपाल ज्यादा अच्छे लगते हैं। अक्सर अखबारों में पढ़ता हूँ कि शिवपाल ने यतीमों के संग ईद मनाई, शिवपाल अनाथों से मिलने पहुंचे, तो उनके प्रति झुकाव सा महसूस होता है। एक दो बार मिलने की इच्छा हुई तो पाँव ठिठक गए। जब अग्रवाल सभा का आमंत्रण पत्र मिला और पत्र द्वारा पता चला कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हमारे नेता शिवपाल सिंह यादव होंगे। मैंने सारी जरूरी बैठकें स्थगित की और 27 की रात का जहाज का टिकट लखनऊ के लिए करा लिया। स्वभाव से अन्र्तमुखी होने के कारण परिचय के बावजूद राजनीतिज्ञों से मैं थोड़ी दूरी बनाए रखता हूँ, पर शिवपाल से मिलने के लोभ का संभरण नहीं कर पाया। इसलिए एक दिन पहले का टिकट कराया। दुर्भाग्य से कोहरे के कारण फ्लाइट कैंसिल हो गई। दूसरे दिन 9 बजे का दोबारा टिकट कराया। शिवपाल से सम्मानस्वरूप स्मृति चिन्ह मिला, उनके हाथों सम्मान लेते हुए मैं स्वयं को काफी रोमांचित पा रहा था, इतना रोमांच व सुख की अनुभूति तो मुझे लंदन एवार्ड सेरेमनी में भी नहीं हुई जब मुझे व मेरे प्रोडक्ट ‘‘मधुसूदन’’ घी को और मुझे यूनाईटेड किंगडम में अव्वल गुणवत्ता के नाते दुनिया के मशहूर व बड़े बिजनेस टाइकूनों के मध्य सम्मानित किया गया था। शिवपाल के चेहरे से ही पाजीटिव इन्सपाइरेशन मिलता है। उनकी एक बात काफी टचिंग थी, कि खूब तरक्की करो, पैसा कमाओ, ऊपर उठो, लेकिन जमीर और जमीन न छोड़ो, अपनी रोशनी थोड़ा ही सही कुछ हिस्सा उन्हें भी दो जो अंधेरे में हैं।
शिवपाल जी से हम जैसे भारतीयों को काफी उम्मीदें हैं। वे सही मायने में जनता के बीच रहने वाले जनता के नेता हैं। मैं उनसे दो बार मिला हूँ एक बार जब वे विपक्ष में थे, एक बार जब वे सत्ता में हैं, दोनों बार मुझे शिवपाल जी की बोली व व्यवहार में फर्क नहीं दिखा। मैं इसी कारण उनका दिल से रेसपेक्ट करता हूँ।
शिवपाल यादव का विराट व विशिष्ट पक्ष
प्रगतिशील समाजवाद के परचम वाहक शिवपाल जी
कार्यकर्ताओं,गरीबों का आदमी है शिवपाल
भारत-लंका के समाजवादियों के संवाद-सेतु